Feeds:
Posts
Comments

Archive for the ‘Poetry’ Category

गरीबी

  आज देखा है एक गरीब का आशियाना ,   आज ही जाना,   कितना मुश्किल है ईस दुनिया मे एक गरीब का जी पाना |  अरे अन्दर की तो सुनिये साहब, भूल जाईये गा पलकें झपकाना |  एक ही थी रोटी, जिसमें चार को था खाना |  अब तक तो बूढी मां ने शुरु कर दिया [...]

Read Full Post »

मशाल

  निकला तो था मैं सूरज की पहली किरण के साथ,   आंख खुली तो देखा,    ये सवेरा मेरा नहीं  है, ये तो बसेरा मेरा नहीं है|   ये जो खो गया है ऊस अन्धकार में, है तो किसी का अतीत ही,   पर वो मेरा नहीं है, कयों कि मेरा अतीत, मेरा भविष्य और वर्तमान,   ईसी सूर्य के [...]

Read Full Post »

Follow

Get every new post delivered to your Inbox.